नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025 — अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से रूसी तेल खरीद बंद करने की सख्त मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से सस्ते दरों पर कच्चा तेल खरीद कर उसे प्रोसेस कर के वैश्विक बाजार में बेच रहा है, जिससे रूस की युद्ध मशीन को आर्थिक समर्थन मिल रहा है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अगर भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा, तो अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 25% से ज्यादा टैरिफ लगाने पर विचार करेगा।
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने साफ कहा है कि वह अपने ऊर्जा हितों और रणनीतिक स्वायत्तता के आधार पर निर्णय लेता है, किसी विदेशी दबाव में नहीं।
भारत का रुख क्यों है स्पष्ट?
1. ऊर्जा सुरक्षा:
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की खपत का लगभग 85% आयात करता है। 2022 से शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया। मौजूदा समय में भारत अपनी तेल जरूरतों का एक-तिहाई से अधिक रूस से पूरी करता है। यदि यह आपूर्ति बंद होती है तो भारत को 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिससे घरेलू महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ेगा।
2. रणनीतिक स्वतंत्रता:
भारत की विदेश नीति “बहुपक्षीय संधि” और “रणनीतिक संतुलन” पर आधारित है। भारत न तो पूरी तरह अमेरिका के पाले में है और न ही रूस के। भारत रूस को एक भरोसेमंद रक्षा सहयोगी मानता है, जिसने दशकों से रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग किया है।
3. पश्चिमी देशों की दोहरी नीति:
भारत ने यह भी सवाल उठाया कि जब यूरोपीय देश अभी भी रूस से गैस, खाद और अन्य उत्पाद खरीद रहे हैं, तो केवल भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी देश भारत पर नैतिकता का बोझ डाल रहे हैं, जबकि खुद अपने आर्थिक हितों से समझौता नहीं कर रहे।
क्या हो सकते हैं परिणाम?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। ट्रंप की चेतावनी के बाद भारत के निर्यातकों में चिंता है, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा और स्टील क्षेत्रों में। हालांकि भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि भारत के बाजार और जनसंख्या को देखते हुए अमेरिका भारत से पूरी तरह संबंध नहीं तोड़ सकता।
निष्कर्ष
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रहित से समझौता नहीं करेगा। मोदी सरकार का संदेश साफ है—रूस से तेल आयात जारी रहेगा जब तक वह भारत के आर्थिक हितों के अनुकूल है। ट्रंप की धमकी के बावजूद भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है।



