अमेरिकी सरकार ने कहा है कि वह पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की परमाणु युद्ध से जुड़ी कथित टिप्पणियों की रिपोर्टों से अवगत है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि इस मामले में वह “आपको पाकिस्तान सरकार की ओर ही भेजेगा।” मुनीर ने ये टिप्पणियाँ उस समय कीं जब वे अमेरिका में मौजूद थे।
अमेरिकी विदेश विभाग से यह भी पूछा कि क्या उसने अमेरिकी धरती पर मुनीर द्वारा दी गई परमाणु धमकी और उस पर भारत की प्रतिक्रिया का संज्ञान लिया है।
“हम इन रिपोर्टों से अवगत हैं और इस मामले में आपको पाकिस्तान सरकार से संपर्क करने की सलाह देंगे, जो सेना प्रमुख असीम मुनीर की कथित टिप्पणियों से संबंधित है,” अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक ई-मेल जवाब में कहा।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिका में एक डिनर के दौरान मुनीर ने कहा था—“हम (पाकिस्तान) एक परमाणु राष्ट्र हैं; अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेंगे।” यह एक अभूतपूर्व परमाणु धमकी थी, जो किसी देश द्वारा दी गई और वह भी अमेरिकी ज़मीन से।
भारत ने इस पर 11 अगस्त को कड़ी प्रतिक्रिया दी और बयान जारी कर कहा कि “परमाणु धमकियाँ देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है।”
भारत सरकार ने कहा—“अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर अपने निष्कर्ष निकाल सकता है। ये बयान इस धारणा को और मजबूत करते हैं कि पाकिस्तान में परमाणु कमान और नियंत्रण की विश्वसनीयता पर संदेह क्यों किया जाता है, खासकर तब जब वहां की सेना आतंकवादी संगठनों के साथ मिली हुई है। यह भी खेदजनक है कि ऐसे बयान एक मित्र तीसरे देश की धरती से दिए गए।” (भारत सरकार का 11 अगस्त का आधिकारिक बयान)
भारत ने यह भी कहा कि वह किसी परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर ज़रूरी कदम उठाता रहेगा।
मुनीर को इस साल जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मेज़बानी दी थी। यह एक अभूतपूर्व कदम था, क्योंकि अब तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को भी ऐसा सम्मान नहीं मिला है। मुनीर एक बार फिर अमेरिका गए थे, जब संयुक्त राज्य अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला को विदाई दी जा रही थी।
भारत में इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि अमेरिका ने मुनीर को इस तरह का मंच दिया, जहाँ से उन्होंने परमाणु धमकियाँ दीं। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जो टिप्पणी की, उससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस मामले की ज़िम्मेदारी लेने से बच रहा है।



