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सुंजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की विरासत की लड़ाई तेज़; बहन मंधिरा ने उठाए सवाल—कहा, “मां रानी कपूर से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराने में क्यों की गई इतनी जल्दबाज़ी?”

by Uttar Akhand Jan Manch
October 4, 2025
in Uttarakhand
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सुंजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की विरासत की लड़ाई तेज़; बहन मंधिरा ने उठाए सवाल—कहा, “मां रानी कपूर से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराने में क्यों की गई इतनी जल्दबाज़ी?”

एक खुलासापूर्ण इंटरव्यू में मंधिरा कपूर ने अपने भाई सुंजय कपूर की अचानक हुई मौत पर सवाल उठाए, ‘मधुमक्खी के डंक से दिल का दौरा’ वाली थ्योरी को खारिज किया और आरोप लगाया कि शोक की अवधि के दौरान उनकी 80 वर्षीय माँ रानी कपूर से जल्दबाज़ी में विरासत के कागज़ों पर हस्ताक्षर कराए गए।

दिवंगत सुंजय कपूर द्वारा छोड़ी गई 30,000 करोड़ रुपये की साम्राज्यिक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच—जो कभी अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पति रह चुके थे—उनकी बहन मंधिरा कपूर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह उनके भाई की मौत के बाद उनकी माँ रानी कपूर को दरकिनार कर दिया गया। मंधिरा ने मौत के कारणों पर सवाल खड़े किए, संपत्ति से जुड़े कागज़ों पर जल्दबाज़ी में हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप लगाया और ‘मधुमक्खी के डंक से दिल का दौरा पड़ने’ वाली थ्योरी पर भी संदेह जताया।

“हमें बेकार की बातें बताई जा रही हैं। मेरी माँ से कागज़ों पर हस्ताक्षर कराने की जल्दबाज़ी थी।”

अपने अब तक के सबसे विस्तृत बयान में मंधिरा कपूर ने भाई की अचानक हुई मौत के बाद के दिनों का ज़िक्र किया। उन्होंने खासतौर पर इस बात पर ज़ोर दिया, जिसे वह अपनी माँ से संपत्ति से जुड़े कागज़ों पर हस्ताक्षर कराने की “जल्दबाज़ी” बताती हैं।

उन्होंने कहा, “मैं बस इतना कह सकती हूँ कि हाँ, मेरी माँ ने बहुत साफ़-साफ़ कहा है कि उनसे कागज़ों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनके बारे में उन्हें शोक की घड़ी में कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्हें कुछ समझाया नहीं गया। हमें इसमें शामिल नहीं किया गया। सब कुछ बंद कमरों में हुआ। और तब से लेकर अब तक उन्होंने बार-बार वे कागज़ माँगे हैं, लेकिन हमें कुछ नहीं दिया गया। इसके बजाय हमें यह कहकर टाल दिया गया कि ईमेल से छेड़छाड़ हुई है और ऐसी-वैसी बेकार बातें। हमें जवाब चाहिए। बहाने मत बनाइए। बताइए माँ ने क्या साइन किया था। अगर उन्होंने साइन किया है, तो कानूनी तौर पर वे कागज़ हमारे पास होने चाहिए। ये सब क्यों छिपाया जा रहा है? और क्यों किया गया? फिर से पूछती हूँ, 13 दिन के शोक काल में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की गई? इसकी क्या ज़रूरत थी?” कपूर ने सवाल उठाया।

साक्षात्कार के एक अन्य हिस्से में मंधिरा ने एक बार फिर शोक काल के भीतर हस्ताक्षरों को निपटाने की कथित जल्दबाज़ी का मुद्दा उठाया। मंधिरा का कहना है कि परिवार ने अब तक बैठकर इन मामलों पर विस्तार से चर्चा नहीं की, बल्कि शोक की घड़ी में ही तेज़ी से कार्रवाई कर दी गई।

मंधिरा कपूर का आरोप है कि उनकी माँ ने अपने बेटे के निधन के 13 दिनों के भीतर ही “वह सब कुछ खो दिया, जिसे वह अपनी संपत्ति मानती थीं।”

उन्होंने कहा, “हमने जो भी कहा है, उसकी वजह साफ़ है। माँ सही कहती हैं कि 13 दिनों में मैंने सब कुछ कैसे खो दिया? यही सवाल मेरे और मेरी बहन के मन में अटका हुआ है। मेरे हिसाब से 13 दिन शोक का समय होता है, उसमें कोई काम नहीं होना चाहिए। लेकिन इतना सब कुछ हो गया, जो हमें समझ नहीं आता। सवाल यहीं से शुरू होता है कि यह जल्दबाज़ी क्यों? इतनी हड़बड़ी किसलिए? जब हमें बताया जा रहा था कि क्या हो रहा है, तो क्यों नहीं हम परिवार के तौर पर साथ बैठे और हर चीज़ पर चर्चा की? यह सब कुछ इतनी जल्दी क्यों हुआ? क्या हमें इस गहरे दुख में शोक मनाने का भी अधिकार नहीं था?” उन्होंने सवाल किया।

सुंजय कपूर की मौत और ‘बी स्टिंग’ थ्योरी

53 वर्षीय सुंजय कपूर की मौत दिल का दौरा पड़ने से बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यूके में पोलो खेलते समय उन्होंने गलती से एक मधुमक्खी निगल ली थी, जिसके बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ।

उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद प्रिया सचदेव को सोना कॉमस्टार—एक ऑटो कंपोनेंट कंपनी जिसके सुंजय कपूर चेयरमैन थे—का नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया।

रानी कपूर ने अपने बेटे की अचानक हुई मौत से जुड़े घटनाक्रम और उसके बाद हुई नियुक्तियों को चुनौती दी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सोना कॉमस्टार से कथित तौर पर अलग-थलग कर दिया गया। इस बीच मंधिरा कपूर ने बड़ा खुलासा किया कि यूके अधिकारियों की रिपोर्ट में, जो सुंजय कपूर की मौत के बाद सौंपी गई थी, उसमें “बी स्टिंग” (मधुमक्खी के डंक) का कहीं ज़िक्र तक नहीं है।

मंधिरा ने कहा, “जिस बात की चर्चा पूरी दुनिया कर रही थी, उसका रिपोर्ट में कोई ज़िक्र नहीं है। केवल हम ही नहीं, पूरी दुनिया इसके बारे में बात कर रही थी। मुझे खेद है, लेकिन मेरे भाई की मौत को मधुमक्खी के डंक से जोड़कर मज़ाक बनाया गया।”

मंधिरा ने विस्तार से बताया कि उनका भाई फिट थे, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक थे और अपनी जीवनशैली को लेकर हमेशा सावधान रहते थे। अचानक हुए हार्ट अटैक पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड सीधे परिवार के साथ साझा किए जाने चाहिए, जो कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक नहीं किया गया है।

साक्षात्कार के दौरान मंधिरा ने कई बार अपने भाई के मेडिकल रिकॉर्ड में पारदर्शिता की मांग की। उनका दावा है कि सुंजय की माँ को भी उनके मेडिकल रिकॉर्ड की मूलभूत जानकारी तक नहीं दी जा रही।

सार्वजनिक तौर पर कड़े सवाल उठाते हुए मंधिरा ने कहा, “मैं उनके मेडिकल इतिहास को देखना चाहती हूँ। क्यों, क्यों हमें यह नहीं दिया जा रहा? क्यों माँ को यह जानकारी नहीं दी जा रही? क्यों हमें इस बारे में कुछ भी नहीं बताया जा रहा? माँ पूछती हैं कि आखिरी बार उन्होंने चेकअप कब कराया था, यह उन्हें कैसे पता है? बस यही हम जानना चाहते हैं। क्या यह न्यायसंगत है कि मेरी माँ को इस सबके बारे में अंधेरे में रखा जाए?”

इसे एक सदमे के तौर पर बताते हुए मंधिरा ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार सुंजय कपूर ने हाल ही में कार्डियोवैस्कुलर जांच कराई थी और उनमें केवल 40% ब्लॉकेज पाया गया था।

उन्होंने कहा, “हम बहुत स्वास्थ्य-सचेत हैं, लगातार चेकअप कराते रहते हैं। मैं मानने को तैयार नहीं हूँ कि मेरे भाई ने ठीक से चेकअप नहीं कराया होगा। और मैं यह भी नहीं मानती कि उन्हें कोई हृदय रोग था। इसलिए अचानक यह सुनना कि मेरे भाई की मौत हार्ट अटैक से हुई—जो हर दिन एक्सरसाइज़ करते थे, योग करते थे, कभी केचप नहीं खाते थे, मैकडॉनल्ड्स तो सवाल ही नहीं था, न केचप, न सोडा, न कुछ और—मेरे लिए यह पागलपन जैसा है कि हाँ, मैं इसे स्वीकार कर लूँ। क्योंकि मधुमक्खी के डंक से मामला हार्ट अटैक तक कैसे पहुँच गया? किसी को परिवार को समझाना होगा। किसी को बताना होगा कि आखिर यह कैसे हुआ, मधुमक्खी के डंक से हार्ट अटैक तक कैसे पहुँच गए।”

मेडिकल लापरवाही की संभावना को खारिज करते हुए मंधिरा ने कहा कि उनका भाई ऐसा इंसान था कि अगर उन्हें ज़रा भी शक होता कि धमनियों में समस्या है, तो तुरंत अस्पताल जाकर चेकअप कराते। “मैं गारंटी से कह सकती हूँ कि अगर मेरे भाई को धमनियों की बीमारी का ज़रा भी शक होता, तो वह तुरंत खुद को चेकअप के लिए ले जाते। वह इसे टालते नहीं,” उन्होंने कहा।


प्रिया सचदेव की नियुक्ति पर सवाल

मंधिरा ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रिया सचदेव की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए—जहाँ उन्होंने अपनी प्रोफेशनल स्टेटस को बदलकर सोना कॉमस्टार में कथित नियुक्ति दर्शाई और इंस्टाग्राम पर अपना नाम ‘Priya Sachdev Kapur’ से बदलकर ‘Priya Sunjay Kapur’ कर लिया। मंधिरा ने कहा, “वह हमेशा प्रिया सचदेव कपूर रही हैं, लेकिन प्रिया सुंजय कपूर क्यों कर लिया? मुझे समझ नहीं आता इसके पीछे क्या सोच थी।”


वसीयत को लेकर पारदर्शिता की कमी

मंधिरा ने यह भी कहा कि उनकी माँ को अब तक यह भी नहीं पता कि उनके बेटे ने असली वसीयत छोड़ी थी या नहीं।

उन्होंने कहा, “मेरी माँ को नहीं पता। माँ लगातार सवाल पूछ रही हैं, लेकिन हमें किसी भी चीज़ का कोई जवाब नहीं मिल रहा। हमें नहीं पता कि वसीयत है या नहीं। मैं इस सवाल का जवाब कैसे दूँ? मैं भी पूछ रही हूँ, माँ भी पूछ रही हैं—क्या किसी को पता है? माँ मुझसे लगातार पूछती हैं। हमें कैसे पता चलेगा? कोई हमारी मदद नहीं कर रहा। और माँ जब भी कोई सवाल करती हैं, उन्हें कहा जाता है कि आपका ईमेल हैक हो गया है। यह सबसे आसान जवाब है। तो हमारे इन सवालों का जवाब कौन देगा? मुझे नहीं पता।” उन्होंने रिपब्लिक को दिए इंटरव्यू में कहा।

‘सब कुछ मेरी माँ के नाम वसीयत किया गया था’

एक भावुक अपील करते हुए मंधिरा कपूर ने कहा कि उनकी माँ को इस बात के जवाब चाहिए कि उन्हें उस विरासत से क्यों अलग-थलग किया गया, जिसकी नींव उनके दिवंगत पिता डॉ. सुरिंदर कपूर ने रखी थी। मंधिरा ने रेखांकित किया कि सुरिंदर कपूर ने सब कुछ उनकी माँ रानी कपूर के नाम वसीयत किया था। उन्होंने उस कथित ट्रस्ट पर भी सवाल उठाया, जिसकी शर्तों के अनुसार सुंजय कपूर की मृत्यु की स्थिति में मुख्य हिस्सेदार उनकी पत्नी प्रिया सचदेव बन जाती हैं।

मंधिरा ने आरोप लगाया कि प्रत्यक्ष रक्त संबंध (direct bloodline) को हर तरह से अलग कर दिया गया है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने इशारा किया कि सीधी वंश परंपरा को पूरी तरह काट दिया गया है और यह संपत्ति “किसी और को सौंप दी गई है।”

स्पष्ट शब्दों में मंधिरा कपूर ने कहा, “यह पागलपन है कि हमें अपनी ही विरासत से काट दिया गया। हमें उस सब से अलग कर दिया गया, जिसके साथ हम बड़े हुए, जिसे हमने अपने माता-पिता को बनाते देखा। पिताजी ने इतनी मेहनत से, यात्राएँ करके यह सब कुछ किसलिए बनाया? ताकि यह सब किसी और को दे दिया जाए?”


वसीयत और ट्रस्ट पर सवाल

यह बताते हुए कि उनके पिता ने सब कुछ सुंजय की माँ रानी कपूर को वसीयत किया था, मंधिरा ने मूल सवाल उठाया कि फिर विरासत का विवाद होना ही क्यों चाहिए।

उन्होंने कहा, “विरासत विवाद होना ही नहीं चाहिए था। सब कुछ मेरी माँ को वसीयत किया गया था। पहले तो उस ट्रस्ट पर सवाल उठाते हैं, जिसके बारे में मेरी माँ को जानकारी तक नहीं है। फिर हम उसकी शर्तों पर बात कर सकते हैं। हमने कभी वह ट्रस्ट देखा ही नहीं। न मैं, न मेरी माँ। माँ 2023 से लगातार पूछ रही हैं, लेकिन हमें अब तक नहीं दिखाया गया। तो मैं आपको कैसे बता सकती हूँ कि किस क्लॉज में क्या लिखा है? कौन सा ट्रस्ट? क्या मेरी माँ ने कोई ऐसा ट्रस्ट बनाया है, जिसके बारे में उन्हें खुद ही पता नहीं? पहले यह जवाब दीजिए कि उस ट्रस्ट में क्या है, क्योंकि मेरी माँ को कोई जानकारी नहीं है। तो आप मुझसे क्लॉज के बारे में सवाल नहीं कर सकते, जब मैंने वह ट्रस्ट देखा ही नहीं।”


‘वह बहुत अच्छे बेटे थे’

माँ और बेटे के रिश्ते को लेकर उठे सवालों पर विराम लगाते हुए मंधिरा कपूर ने कहा कि सुंजय एक बहुत अच्छे बेटे थे। वह अपनी माँ को अक्सर फ़ोन करते थे और उनका रिश्ता बिल्कुल सामान्य माँ-बेटे जैसा था।

उन्होंने कहा, “वह और माँ हमेशा बात करते थे। जब भी आते तो कहते, ‘माँ, मैं आपको मिस करता हूँ, मैं आपसे प्यार करता हूँ।’ वह बहुत अच्छे बेटे थे। माँ का ख़्याल रखते थे, वह बहुत अच्छे थे। हमेशा माँ से जुड़े रहते थे।”


वर्तमान स्थिति

जैसे-जैसे प्रत्यक्ष रक्त संबंध सुंजय कपूर की विरासत के लिए लड़ाई लड़ रहा है, उनकी पत्नी की ओर से अब तक माँ और बहन के आरोपों पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

डिस्क्लेमर: इस इंटरव्यू में व्यक्त विचार और दावे मंधिरा कपूर के हैं। रिपब्लिक इन दावों का समर्थन नहीं करता और न ही स्वतंत्र रूप से उनकी पुष्टि कर सकता है।

Uttar Akhand Jan Manch

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