20 अगस्त को लोकसभा ने केवल सात मिनट की चर्चा के बाद प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पास कर दिया। अगले ही दिन राज्यसभा ने भी इसे मंज़ूरी दी और 22 अगस्त को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन गया।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारतीय हर साल करीब ₹15,000 करोड़ “रियल मनी गेम्स” (RMGs) में गंवा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने RMGs को जबरदस्ती खेलने की प्रवृत्ति (compulsive behaviour), मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और पारिवारिक जीवन के टूटने से जोड़ा है।
इन खतरों को दर्शाते हुए, पिछले 31 महीनों में कर्नाटक से ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते आत्महत्या के 32 मामले दर्ज किए गए हैं।
दूसरी ओर, RMG उद्योग का कहना है कि इस प्रतिबंध से देशभर में 400 से अधिक कंपनियों में काम कर रहे दो लाख से ज़्यादा लोगों की नौकरियाँखतरे में पड़ सकती हैं।
ऑनलाइन गेम्स के तीन खंड कौन से हैं?
इस अधिनियम ने ऑनलाइन गेम्स को तीन श्रेणियों में बाँटा है—
- ई-स्पोर्ट्स (E-Sports): प्रतिस्पर्धात्मक खेल, जिन्हें अब औपचारिक रूप से खेल के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा।
- सोशल गेमिंग (Social Gaming): मनोरंजन या शैक्षिक उद्देश्य वाले गेम, जिनमें पैसे का दांव शामिल नहीं होता।
- रियल मनी गेम्स (RMGs): ऐसे गेम जिनमें नकद दांव या इनाम होता है।
अधिनियम का उद्देश्य ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को प्रोत्साहित करना है, जबकि सभी तरह के RMGs और उनके विज्ञापनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा।
अधिनियम में ऑनलाइन गेम्स की परिभाषा
ऑनलाइन मनी गेम (RMGs):
अधिनियम के अनुसार ऑनलाइन मनी गेम ऐसा कोई भी ऑनलाइन खेल है, जिसे कौशल (स्किल), किस्मत (चांस) या दोनों के आधार पर खेला जाए और जिसमें खिलाड़ी को या तो फीस अदा करनी हो या पैसा अथवा अन्य दांव (जैसे क्रेडिट्स, कॉइन्स, टोकन, वर्चुअल मनी आदि, जिन्हें असली पैसे में बदला जा सकता है) जीतने की उम्मीद हो।
इस परिभाषा के तहत पोकर, रम्मी, फैंटेसी क्रिकेट और लूडो जैसे लोकप्रिय खेलों के विभिन्न रूप RMGs की श्रेणी में आएँगे।
कई ऐसे प्लेटफ़ॉर्म्स का प्रचार प्रसिद्ध हस्तियाँ करती हैं, जैसे—
- रणबीर कपूर और आमिर खान (Dream11)
- महेंद्र सिंह धोनी (WinZo)
- ऋतिक रोशन (RummyCircle)
- सौरव गांगुली (My11Circle)
ई-स्पोर्ट्स (E-Sports):
अधिनियम में ई-स्पोर्ट्स को ऐसे खेलों के रूप में परिभाषित किया गया है जो नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हों और प्रस्तावित नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) में पंजीकृत हों।
इनमें पंजीकरण शुल्क या भागीदारी शुल्क लिया जा सकता है और खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार राशि भी मिल सकती है।
उदाहरण: ग्रैंड थेफ्ट ऑटो (Grand Theft Auto), कॉल ऑफ ड्यूटी (Call of Duty)
सोशल गेमिंग (Social Gaming):
हालाँकि सोशल गेमिंग की कोई औपचारिक कानूनी परिभाषा नहीं है, लेकिन इसे ऑनलाइन गेम्स की व्यापक श्रेणी में शामिल किया गया है।
ये ऐसे गेम्स हैं जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल डिवाइस पर खेले जाते हैं और इंटरनेट पर सॉफ़्टवेयर के रूप में संचालित होते हैं।
धारा 4 (Section 4) के अंतर्गत सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह सोशल गेम्स के विकास और उपलब्धता को मनोरंजन तथा शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रोत्साहित कर सके।नियमन से जुड़े प्रावधान क्या कहते हैं?
अधिनियम में ऑनलाइन मनी गेम्स पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है—
- ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश करना, धन लेन-देन या अनुमति देना:
अधिकतम 3 साल की कैद, या अधिकतम ₹1 करोड़ का जुर्माना, या दोनों। - अवैध विज्ञापन करना:
अधिकतम 2 साल की कैद, या अधिकतम ₹50 लाख का जुर्माना, या दोनों। - BNSS, 2023 के तहत ये अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती (cognisable & non-bailable) माने जाएँगे।
केंद्र सरकार ने कहा है कि भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-IN) उन ऐप्स को ब्लॉक या डिसेबल करेगी जो भारत में प्रतिबंधित मनी गेमिंग सेवाएँ उपलब्ध कराएँगे। ज़रूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद लेकर विदेशी ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority):
अधिनियम केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह एक नियामक प्राधिकरण गठित करे, जो ऑनलाइन गेम्स को मान्यता दे, उन्हें श्रेणीबद्ध करे और पंजीकृत करे।
पहले, 2023 में आईटी मंत्रालय ने इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम, 2021में बदलाव किए थे, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को इंटरमीडियरी माना गया। इन नियमों के तहत—
- स्वयं-नियमन निकाय (self-regulated bodies) सरकार की निगरानी में काम करेंगे।
- कंपनियों को KYC मानकों का पालन करना होगा।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए पैरेंटल एक्सेस कंट्रोल और आयु-आधारित रेटिंग सिस्टम लागू करना होगा।
नए अधिनियम की विशेषताएँ:
इसमें भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) से बजट आवंटन का प्रावधान है, ताकि देश में ऑनलाइन सोशल गेमिंग को बढ़ावा दिया जा सके।
नाबालिगों (minors) को सोशल गेम्स या ई-स्पोर्ट्स खेलने से रोकने का कोई प्रावधान इसमें नहीं है।



