उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से एक बड़ा विवाद सामने आया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ केदार सभा के पंडे-पुरोहितों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष द्विवेदी मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं की अनदेखी कर मनमानी तरीके से निर्णय ले रहे हैं। पंडे-पुरोहितों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से तत्काल हेमंत द्विवेदी को पद से हटाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
⚠️ परंपराओं की अनदेखी का आरोप
केदार सभा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि बीकेटीसी अध्यक्ष मंदिर से जुड़ी परंपरागत व्यवस्थाओं और नियमों में बिना स्थानीय पुजारियों और सेवायतों से सलाह-मशविरा किए बदलाव कर रहे हैं।
धाम में पूजा-अर्चना, सेवाएं और पारंपरिक रीतियों को लेकर वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं में हाल के दिनों में कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन्हें स्थानीय पुजारियों ने “एकतरफा” और “आस्था के खिलाफ” बताया है।
केदार सभा का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं का मुद्दा है। यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो मंदिर की गरिमा पर आंच आ सकती है।
📢 केदार सभा की सख्त चेतावनी
सभा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर हेमंत द्विवेदी को पद से तत्काल नहीं हटाया गया, तो वे केदारनाथ धाम में विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू करेंगे।
सभा ने कहा कि उन्होंने सरकार और प्रशासन को पहले ही इस संबंध में ज्ञापन सौंप दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पंडे-पुरोहितों ने कहा कि वे किसी भी तरह की मनमानी या धार्मिक परंपराओं से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे और आंदोलन को राज्यव्यापी रूप भी दिया जा सकता है।
🏛️ समिति अध्यक्ष का पद और उसका महत्व
गौरतलब है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति राज्य के चारधाम — बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री — की धार्मिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संचालित करती है।
इस समिति का अध्यक्ष पद धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली होता है। अध्यक्ष के निर्णयों का सीधा असर धामों की व्यवस्थाओं, परंपराओं और श्रद्धालुओं के अनुभव पर पड़ता है।
इसी कारण केदार सभा का विरोध केवल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकारों और परंपरागत व्यवस्थाओं की रक्षा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
👀 सरकार की भूमिका पर नजर
अब सबकी निगाहें उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर हैं।
सरकार को इस विवाद को जल्द सुलझाने की चुनौती है, क्योंकि मामला सीधे केदारनाथ धाम की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। आगामी यात्रा सीजन और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, प्रशासनिक और धार्मिक पक्षों के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो गया है।
देखना होगा कि सरकार केदार सभा की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं।



