अमेरिका:- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन और ब्राज़ील पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। यह फैसला वेनेजुएला के बाद अब रूस से व्यापार करने वाले देशों को निशाने पर लेते हुए लिया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रूस से तेल और अन्य उत्पाद खरीदने वाले देशों पर सख़्त आर्थिक दबाव बनाया जाएगा।
ट्रंप प्रशासन ने इस संबंध में एक विधेयक को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। प्रस्तावित बिल के अनुसार भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों को अमेरिका को आयात पर 500 प्रतिशत तक शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

इस फैसले का असर वैश्विक बाज़ारों पर भी देखने को मिला। ट्रंप के इस कदम के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार में हड़कंप मच गया और भारत सहित एशियाई बाज़ारों में भी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गुरुवार को शेयर बाज़ार खुलते ही एक्सपोर्ट और टेक्सटाइल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाज़ार में लगभग 13 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि भारत, चीन और ब्राज़ील रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध मशीन को मज़बूत कर रहे हैं। इसी को रोकने के लिए यह विधेयक लाया गया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह बिल रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने विधेयक को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी संसद से पारित होना बाकी है। अगले सप्ताह इसकी वोटिंग होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह विधेयक पास होता है, तो अमेरिका में आयात होने वाले सामानों और सेवाओं पर भारी शुल्क लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ लागू होता है तो भारत, चीन और ब्राज़ील की अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ वैश्विक व्यापार पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। भारत के लिए यह फैसला ऊर्जा आयात और निर्यात दोनों ही मोर्चों पर चुनौती बढ़ा सकता है।



