उत्तराखण्ड:- अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। चार साल की लंबी खामोशी के बाद अचानक इस मामले में एक नई “साफ़धारी एंट्री” सामने आई है, जिसने न केवल जांच एजेंसियों बल्कि आम जनता के बीच भी कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले चर्चित एक्टिविस्ट अनिल जोशी का इस प्रकरण में डीजीपी दरबार तक पहुंचना अब चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, अनिल जोशी ने डीजीपी और गृह विभाग के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ अहम पहलुओं की दोबारा जांच की मांग की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मामला पहले ही अदालत में विचाराधीन है और पुलिस अपनी जांच पूरी होने का दावा कर चुकी है। ऐसे में चार साल बाद उठी यह आवाज कई तरह के सवालों को जन्म दे रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में जब अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देश, प्रदेश और मीडिया में उबाल था, तब अनिल जोशी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। उस दौर में जहां सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और न्याय की मांग तेज थी, वहीं अब अचानक इस मामले में उनकी सक्रियता पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह आवाज अब क्यों उठी? अपनी शिकायत में अनिल जोशी ने हत्याकांड से जुड़ी एक “अज्ञात वीआईपी” की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह वही सवाल है, जो घटना के शुरुआती दिनों से ही चर्चा में रहा, लेकिन जांच के दौरान कभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस अज्ञात वीआईपी को लेकर चर्चाएं होती रहीं, लेकिन जांच की फाइलों में यह सवाल कहीं दबता चला गया। अब एक बार फिर इस मुद्दे के सामने आने से लोगों के मन में यह शंका गहराने लगी है कि क्या जांच में कुछ पहलू अधूरे रह गए थे, या फिर यह मामला केवल समय की राजनीति बनकर रह गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या चार साल बाद केस में नई एंट्री न्याय की दिशा में एक ठोस कदम है, या फिर यह केवल शोर पैदा करने तक ही सीमित रहेगा।
पुलिस ने अनिल जोशी की शिकायत को प्राप्त कर उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है, हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जांच किस स्तर तक आगे बढ़ेगी। दूसरी ओर, आम लोगों के मन में सवालों की फाइल और मोटी होती जा रही है। क्या अंकिता को अब भी पूरा न्याय मिल पाया है? क्या जिन सवालों के जवाब घटना के दिन चाहिए थे, वे आज भी वैसे ही अनुत्तरित हैं? देहरादून की सड़कों पर भले ही फिलहाल खामोशी हो, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब न्याय सबसे अधिक जरूरी था, तब ये आवाजें कहां थीं? और अब जब मामला अदालत में है, तब एक नई एंट्री क्या सच में सच्चाई तक पहुंचने में मदद करेगी?
अंकिता भंडारी हत्याकांड की फाइल में एक और पन्ना जुड़ गया है। यह पन्ना न्याय तक ले जाएगा या केवल बहस और सवालों को और गहरा करेगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला आज भी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि नए सवालों के साथ फिर से ज़िंदा हो उठा है।



