उत्तराखण्ड:- इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर साझा किए जाने से नाराज़ एक नर्सिंग छात्रा ने आवेश और कथित रूप से लोगों के बहकावे में आकर अपने ही पुराने मित्र के खिलाफ दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया, लेकिन न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान इस मामले की सच्चाई सामने आ गई। ट्रायल के दौरान स्वयं शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि आरोपी उसका पुराना मित्र था और उसके द्वारा लगाए गए आरोप गुस्से में आकर लगाए गए थे। बयानों में लगातार विरोधाभास और आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए पोक्सो न्यायालय की न्यायाधीश रजनी शुक्ला ने आरोपी को दोषमुक्त करार दिया।
मामले के अनुसार, पीड़िता ने 10 दिसंबर 2022 को अपने मित्र तनवीर अहमद के खिलाफ दुष्कर्म, गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की और लगभग चार माह की जांच के उपरांत 3 अप्रैल 2023 को आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मामला नियमित ट्रायल के लिए पोक्सो कोर्ट में विचाराधीन रहा।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान मामले ने नया मोड़ लिया, जब पीड़िता अपने पूर्व में दिए गए बयानों से मुकर गई। अदालत के समक्ष दिए गए बयान में उसने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वह आरोपी तनवीर अहमद को पहले से जानती थी और दोनों के बीच पिछले दो से तीन वर्षों से मित्रता थी। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी द्वारा उसकी तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने से वह नाराज़ हो गई थी और इसी नाराज़गी व आवेश में आकर उसने उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
पीड़िता ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि आरोपी ने उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती, दुष्कर्म या आपराधिक कृत्य नहीं किया था। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खा सके, वहीं मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी आरोपों की पुष्टि करने में असफल रहे। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
सभी तथ्यों, साक्ष्यों की कमी, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और स्वयं शिकायतकर्ता के स्वीकारोक्ति को ध्यान में रखते हुए पोक्सो न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अपने निर्णय में न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि झूठे आरोप न केवल किसी निर्दोष व्यक्ति के जीवन, प्रतिष्ठा और भविष्य को गहरा नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था पर भी अनावश्यक दबाव डालते हैं।
