रुड़की। आईआईटी रुड़की ने इंडो-डेनिश द्विपक्षीय अनुसंधान पहल के तहत डिजिटलाइज्ड ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम (H2-BRIDGE) पर एक उच्चस्तरीय हितधारक कार्यशाला की मेजबानी की। कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने ग्रीन हाइड्रोजन (GH2) के एकीकरण, डिजिटल ऊर्जा प्रणालियों और स्केलेबल समाधानों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
H2-BRIDGE, ग्लोबल इनोवेशन नेटवर्क प्रोग्राम के अंतर्गत संचालित एक रणनीतिक सहयोग है, जिसमें आईआईटी रुड़की, एमएनआईटी जयपुर, आईआईटी मद्रास, आईटी यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क तथा इनोवेशन सेंटर डेनमार्क शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप अनुसंधान और बड़े पैमाने पर तैनाती के बीच सेतु स्थापित करना है।
उद्घाटन सत्र में भारत में डेनमार्क के राजदूत महामहिम रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसेन ने द्विपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत और डेनमार्क स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, आईआईटी रुड़की के उपनिदेशक यू.पी. सिंह ने संस्थान की बहुविषयक अनुसंधान एवं वैश्विक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्यशाला के दौरान GH2 एकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र डिज़ाइन, डिजिटल ऊर्जा ग्रिड और बाजार ढांचे पर तीन प्रमुख पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें ओएनजीसी, एनटीपीसी, एनएचपीसी आरई लिमिटेड, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, टेरी, बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड सहित कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को और मजबूत करने तथा ग्रीन हाइड्रोजन आधारित टिकाऊ ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। यह आयोजन सतत ऊर्जा अनुसंधान और वैश्विक साझेदारी में आईआईटी रुड़की की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है।




