दावे चमकदार, लेकिन निगम कार्यालय का शौचालय ही बदहाल।
रुड़की। रुड़की नगर निगम एक ओर अपनी उपलब्धियों और योजनाओं के बड़े-बड़े दावे करता नजर आता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। शहर की सफाई व्यवस्था की स्थिति पहले ही चिंताजनक बनी हुई है, वहीं हैरानी की बात यह है कि स्वयं नगर निगम कार्यालय के अंदर बने शौचालयों की हालत बेहद खराब है।
निगम परिसर में गंदगी, दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण साफ तौर पर व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम अपने ही कार्यालय की साफ-सफाई सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था कैसे दुरुस्त होगी?
वहीं महापौर अनीता अग्रवाल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि वे अधिकतर कार्यक्रमों और आयोजनों में व्यस्त रहती हैं, जिससे शहर की मूलभूत समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इसके साथ ही उनके पति ललित मोहन अग्रवाल द्वारा शहर को “चमका देने” के दावे भी किए जाते रहे हैं। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर बदलाव नजर नहीं आ रहा। आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर सक्रियता तो दिखती है, पर सफाई व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं दिखाई दे रहा।
नगर आयुक्त राकेश चंद्र तिवारी प्रतिदिन कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन निगम परिसर के शौचालयों की दयनीय स्थिति इस ओर संकेत करती है कि सफाई व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि शहर की स्वच्छता को लेकर ठोस कदम उठाएंगे, या फिर दावों और प्रचार तक ही सीमित रहेंगे।




