हरिद्वार। होली के रंगों और उल्लास के बीच हरिद्वार में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली, जहां गुलाल और अबीर की जगह श्मशान की राख से होली खेली गई। हरिद्वार में किन्नर समाज के लोगों ने श्मशान की राख के साथ आपस में होली मनाई।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव रंगभरी एकादशी के दिन देवी गौरी का गौना कराकर काशी पहुंचे थे। कहा जाता है कि उस दिन वे भूत-प्रेत, यक्ष और गंधर्वों के साथ होली नहीं खेल पाए और अगले दिन उन्होंने श्मशान में होली खेली। इसी से ‘मसान होली’ मनाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
खड़खड़ी श्मशान घाट पर किन्नर अखाड़े ने निभाई परंपरा
हरिद्वार में किन्नर अखाड़े ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर मसाने की होली खेली। किन्नर समाज के लोगों ने चिताओं की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की और फिर उसी राख व रंग के साथ होली का उत्सव मनाया।
श्मशान में चिताओं के सामने किन्नरों को होली खेलते देख कई लोग आश्चर्यचकित रह गए। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी ने बताया कि यह एक पौराणिक परंपरा है, जिसे वे श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रहे हैं।
बैंड-बाजे के साथ किन्नर समुदाय के सदस्य श्मशान घाट पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद मसान होली का आयोजन किया।




