भारत की राष्ट्रपति Draupadi Murmu इस समय Uttarakhand में तीन-दिन के दौरे पर हैं, और इस यात्रा के दौरान वे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इस दौरे में विशेष रूप से Nainital का नाम इसलिए प्रमुख रहा है क्योंकि माना जा रहा है कि वे नैनीताल आने वाली पहली महिला राष्ट्रपति होंगी — जो इस पहाड़ी जिले में अपनी उपस्थिति दर्ज कर इतिहास रच रही हैं।
दौरे के प्रमुख कार्यक्रम
राष्ट्रपति Murmu का यह दौरा 2 नवंबर से शुरू हुआ है, जिसमें वे हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल-कैंची धाम जैसे स्थानों पर कार्यक्रम करेंगी।
विशेष रूप से:
- 3 नवंबर को वे नैनीताल के राजभवन (Raj Bhavan Nainital) के 125 वर्ष पूरा होने के अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होंगी।
- अगले दिन 4 नवंबर को वे कैंची धाम (Kainchi Dham) का दौरा करेंगी – इस मंच पर भी यह पहली महिला राष्ट्रपति होंगी।
सुरक्षा-व्यवस्था व तैयारियाँ
उनकी सुरक्षा को लेकर यूपी-एनके के पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त इंतजाम किए हैं। उदाहरण के लिए, नैनीताल में 273 होटल-ढाबों की जांच हुई, 234 बाहरी व्यक्तियों की चेकिंग की गई और 165 वाहनों पर कार्रवाई हुई।
देहरादून में कुछ इलाकों को ‘साइलेंट जोन’ घोषित किया गया है ताकि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान शांति बनी रहे।
नैनीताल का ऐतिहासिक महत्व
नैनीताल की यात्रा इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह स्थान अपनी सुंदरता, राजसी-विरासत और पर्यटन के लिए जाना जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru भी नैनीताल में आए थे और वहां बोटिंग का आनंद लेते थे। इस पृष्ठभूमि में इस पहाड़ी स्थल पर राष्ट्रपति का आगमन सामाजिक-ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजभवन नैनीताल में ब्रिटिशकालीन गोथिक शैली की इमारत है, और इसे 125 साल पूरा हो चुके हैं — इस अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा एक संग्रहीत डाक टिकट का विमोचन भी होगा।
क्या यह पहला मौका है?
हाँ — राष्ट्रपति Murmu नैनीताल तथा कैंची धाम जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर पहली महिला राष्ट्रपति होंगी। यह एक प्रतीकात्मक क्षण है जो महिला नेतृत्व की प्रगति और पहाड़ी क्षेत्रों के साथ उनका सह-संबंध दर्शाता है।
राष्ट्रपति Draupadi Murmu की इस यात्रा का मतलब सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है; यह एक संदेश भी है– कि भारत के सबसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठी महिला नेता पहाड़ी प्रदेश, पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विरासत के केंद्रों का दौरा कर रही हैं। सुरक्षा व तैयारियों से स्पष्ट है कि यह एक सम्मानित, सुचारु एवं यादगार यात्रा होगी। नैनीताल को इस ऐतिहासिक क्षण के लिए याद किया जाएगा जब पहली महिला राष्ट्रपति वहां पधारीं।
यह दौर पर्वतीय क्षेत्रों, पर्यटन-संस्कृति और नेतृत्व को जोड़ने का है, और इस यात्रा ने इसे नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।



