उत्तराखण्ड:- अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग अब केवल एक परिवार या क्षेत्र तक सीमित न रहकर देशभर की बेटियों की आवाज बनती जा रही है। इसी कड़ी में कक्षा 10वीं की छात्रा संजना ने देश की राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस जघन्य मामले में न्याय की गुहार लगाई है। अपने पत्र में संजना ने कहा है कि अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना और उसके बाद न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी ने उसे और उसकी सहेलियों को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया है।
पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या एक आम लड़की की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है और क्या प्रभावशाली या VIP लोगों को अपराध करने की छूट दी जा सकती है। छात्रा ने राष्ट्रपति को न केवल देश की प्रथम नागरिक बल्कि एक महिला और अभिभावक के रूप में संबोधित करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उसने मांग की है कि इस प्रकरण में शामिल सभी दोषियों को, चाहे वे किसी भी पद या प्रभाव के हों, कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत माता की बेटियों को सुरक्षित वातावरण में जीने का अधिकार है और न्याय में देरी समाज के विश्वास को कमजोर करती है। संजना का यह पत्र देश की युवा पीढ़ी के भीतर बढ़ती जागरूकता और न्याय के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि आज की बेटियाँ अन्याय के खिलाफ चुप रहने को तैयार नहीं



