जिला मुख्यालय से सटे तहसील क्षेत्र के डुंगरी, पाभैं और धारी गांवों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए गए सड़े और कीटग्रस्त राशन को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सस्ते गल्ले की दुकानों से चावल लेने पहुंचे ग्रामीणों को उस समय झटका लगा, जब बोरियां खोलते ही अनाज में कीड़े रेंगते दिखाई दिए और दुर्गंध फैलने लगी। इसे लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इसे गरीबों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ बताया। ग्रामीणों का एक स्वर में कहना था कि क्या गरीब होने का यही दंड है कि उन्हें सड़ा-गला और कीड़ों से भरा राशन दिया जाए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह राशन गोदाम से भेजा गया है, जिस पर वर्ष 2023 की तिथि अंकित है, जिससे स्पष्ट होता है कि लंबे समय से डंप पड़ा खराब अनाज उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया। इस घटना से नाराज ग्रामीण शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पांडेय के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीण अपने साथ सड़े और कीड़े लगे राशन की फोटो और वीडियो भी लाए और जिलाधिकारी आशीष भटगाईं को पूरे मामले से अवगत कराया। नरेश पांडेय ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में नया सस्ता गल्ला विक्रेता नियुक्त हुआ है और पूर्ति विभाग द्वारा उस पर जबरन पुराना, सड़ा और कीटग्रस्त राशन थोप दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन वितरण से पहले गुणवत्ता की कोई जांच नहीं की गई। रात के समय खाद्यान्न से भरा वाहन दुकान पर आया और बिना किसी निरीक्षण के बोरियां उतारकर चला गया। जब उपभोक्ता सुबह राशन लेने पहुंचे तो खराब अनाज देखकर लोगों में रोष फैल गया। ग्रामीणों ने मांग की कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

जिलाधिकारी आशीष भटगाईं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी लगभग दो माह पूर्व जिला मुख्यालय से लगे कुछ गांवों में सड़ा खाद्यान्न भेजे जाने का मामला सामने आया था। उस समय गोदाम में नया राशन उपलब्ध न होने का हवाला देकर पुराना राशन वितरित करने की बात कही गई थी। हालांकि इस बार बोरियों पर 2023 की तिथि अंकित होना मामले को और भी गंभीर बना रहा है, जिससे पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।



