तकनीकी दिग्गज गूगल का Android Earthquake Alerts (AEA) सिस्टम वर्षों से भूकंप से पहले कुछ सेकेंड की चेतावनी देने का वादा करता था। लेकिन फरवरी 2023 की तुर्की आपदा, जिसमें 55,000 से अधिक लोगों की जान चली गई, ने इस सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गूगल ने हाल ही में इस विफलता को स्वीकार किया है कि सिस्टम समय रहते अलर्ट नहीं भेज पाया
BBC की गहराई से की गई रिपोर्ट में कहा गया कि तीन तुर्की शहरों में सैकड़ों लोगों से बात की गई तो किसी ने भी शुरुआती भूकंप से पहले किसी प्रदेशक अलर्ट की सूचना नहीं दी। जबकि गूगल का प्रतिनिधि Micah Berman ने इस बात पर जोर दिया कि सिस्टम ने लाखों लोगों को अलर्ट भेजा—but कोई ठोस डेटा प्रदान नहीं किया गया।
तकनीकि कारण और आलोचना:
- सिस्टम ने भूकंप की तीव्रता का गलत अनुमान लगाया (लगभग 4.5–4.9), जबकि वास्तविक तीव्रता 7.8 थी—यह एक गंभीर त्रुटि थी।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी और फोन की सेटिंग्स — जैसे DND या साइलेंट मोड — भी अलर्ट प्राप्त नहीं होने के कारण बने।
विशेषज्ञों की चिंता:
Colorado School of Mines की Elizabeth Reddy ने कहा, “यह जानने में निराशा होती है कि सच्चाई सामने आने में इतना समय लगा।” वहीं Harold Tobin ने जोर दिया कि गूगल को ऐसी प्रणालियों के लिए पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की जिम्मेदारी उठानी होगी, क्योंकि यहां मानव जीवन दांव पर है।
गूगल की सुधार योजना:
- कंपनी ने स्वीकार किया कि अल्गोरिद्म में सुधार की जरूरत है और अब निर्देश देती है कि बड़े भूकंप के मॉडल डेटा को नए ढंग से टेस्ट करें।
- जो तकनीक 1,200 से ज्यादा भूकंपों का अलर्ट दे चुकी है और 11,000 से अधिक घटनाएँ डिटेक्ट कर चुकी है, उसे और बेहतर बनाने की योजना है।
उपयोगकर्ता अनुभव और सीमाएं:
- Reddit पर कई यूज़र ने बताया कि उन्होंने कभी अलर्ट नहीं पाया या उनका फोन साइलेंट मोड में होने के कारण सुनाई नहीं दिया।
- दूसरी ओर, कुछ ने अनुभव साझा किया कि प्रणाली ने कभी-कभी केवल सेकेंड्स का वॉर्निंग दे दिया, जो सितानुमा स्थिति में बचाव के लिए पर्याप्त हो सकता है।
निष्कर्ष:
गूगल का Android Earthquake Alert System एक अभिनव तकनीक है, लेकिन तुर्की त्रासदी ने दिखाया कि बड़े पैमाने पर काम नहीं कर पाने की स्थिति भी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम सरकारी चेतावनी प्रणालियों की जगह नहीं ले सकता और इसे पारदर्शी, डेटा-साझा, और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाना होगा।
यदि तकनीक समय पर सुधार जाए, तो भविष्य में करोड़ों लोग कुछ सेकेंड की अलर्ट से जान बचा सकते हैं — लेकिन तब तक यह सिस्टम केवल पूरकही माना जाना चाहिए, प्राथमिक चेतावनी स्रोत नहीं।



