Axiom Mission-4 से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का सफल दौरा कर लौटे भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक खास बयान में कहा है, “जब मैं लौटा तो फोन भी भारी लग रहा था, जैसे गुरुत्वाकर्षण खुद मुझे गले लगा रहा हो।”
शुक्ला ने यह अनुभव Axiom स्पेस स्टेशन से लौटने के बाद मीडिया से साझा किया। उन्होंने बताया कि स्पेस में 14 दिन बिताने के बाद जब वह पृथ्वी पर लौटे, तो उनका हाथ गलती से लैपटॉप गिरा बैठा, क्योंकि उन्हें लगा वह तैरता रहेगा। “माइक्रोग्रैविटी ने हमारी बॉडी मैपिंग को पूरी तरह से बदल दिया था,” उन्होंने कहा।
गगनयान मिशन के लिए सीधे उपयोगी अनुभव
The Hindu से बात करते हुए शुक्ला ने कहा, “ISS पर सीखा हर मिनट हमारे देश के गगनयान मिशन में योगदान देगा। हमने जो माइक्रोग्रैविटी एक्सपेरिमेंट्स किए हैं, उनके वैज्ञानिक विश्लेषण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।”
भारत सिर्फ उड़ान नहीं भर रहा, नेतृत्व कर रहा है
Times of India और India Today की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “India is not just flying to space, we are entering our second orbit — to lead.” यह बयान भारत की नई स्पेस नीति और आत्मनिर्भरता को प्रतिबिंबित करता है।
Axiom-4 में भारत की सफलता
Economic Times के अनुसार, Axiom-4 भारत और गगनयान मिशन दोनों के लिए बड़ी कामयाबी रहा। शुभांशु शुक्ला ने कहा, “हमने न केवल उड़ान भरी, बल्कि अंतरिक्ष में भारतीय वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया।”
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