1 अगस्त 2025 की सुबह, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की प्लैटफॉर्म संख्या 8/9 पर जो कुछ हुआ, वह देश के लिए सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चौंकाने वाली सीख बन गया। पहले इसे “भगदड़” कहा गया, लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अब संसद में साफ किया है:
“यह भगदड़ नहीं थी। एक यात्री के सिर से भारी हेडलोड गिरा, जिससे उसके पास खड़े यात्री उस पर गिर पड़े। दबाव में 18 लोगों की मृत्यु हुई।”
सच क्या है?
NDTV और Times of India की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब एक यात्री ने सिर पर रखा बड़ा भारी बैग गिरा दिया। पीछे खड़े यात्री पहले तो चौंके, फिर एक-दूसरे पर गिरने लगे। कुछ ही सेकंड में यह स्थिति दबाव, खौफ और सांस न ले पाने की हो गई। CCTV फुटेज में भी साफ दिख रहा है — कोई भगदड़ नहीं, सिर्फ एक सामान गिरा और लोग ज़मीन पर आ गिरे।
“स्टांपेड” शब्द की गलती
News18 ने रेलवे प्रवक्ता के हवाले से बताया कि “किसी ने दौड़ नहीं लगाई थी। प्लेटफॉर्म पर सामान्य भीड़ थी। एक ‘हेडलोड’ यानी सिर पर रखा थैला गिरा और आसपास के लोग उस पर गिर पड़े। मौतें कुचलने से नहीं, दम घुटने और दबाव में हुईं।”
रेलवे की आधिकारिक जिम्मेदारी और कार्रवाई
Mint के मुताबिक़, रेलवे ने दोषी यात्री की पहचान कर ली है जिसने हेडलोड गिराया था। अभी तक उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है क्योंकि घटना “जानबूझकर” नहीं थी।
रेलवे ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और घायलों को ₹2 लाख की सहायता की घोषणा की है। गंभीर सवाल यह है कि यदि एक बैग इतना भारी था कि गिरते ही 18 लोग जान गंवा बैठे, तो क्या ऐसे सामानों की बोर्डिंग से पहले कोई स्कैनिंग हो रही थी?
जनता का आक्रोश – यह लापरवाही नहीं तो क्या है?
The Indian Express ने रिपोर्ट किया कि संसद में विपक्ष ने इस घटना को “प्रशासनिक लापरवाही” करार दिया। सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी है कि “इतने बड़े जंक्शन पर कोई crowd management protocol नहीं था?”
रेल मंत्री ने यह स्वीकार नहीं किया कि स्टेशन पर अधिक भीड़ थी, बल्कि कहा कि “सिर्फ एक अनियंत्रित घटना” से यह हादसा हुआ।
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