वस्तु एवं सेवा कर (GST) ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इसे “नेक्स्ट-जनरेशन” सुधार बताया था। इस नए ढांचे से रोज़मर्रा की इस्तेमाल की चीज़ों की कीमतों में कटौती होने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार टैक्स की श्रेणियों को कम और सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है।
यात्री वाहन और दोपहिया भी होंगे सस्ते
संशोधित जीएसटी ढांचा यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों पर लगने वाले टैक्स को भी घटाने वाला है।
नई दरें – 5% और 18%
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो मुख्य दरें प्रस्तावित की हैं। जिन वस्तुओं पर फिलहाल 12 और 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है, उन्हें अब इन दो श्रेणियों में समायोजित किया जाएगा।
28% से 18% और 12% से 5%
विशेष रूप से, सरकार का इरादा है कि जिन वस्तुओं पर अभी 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है, उनमें से 90 प्रतिशत पर टैक्स घटाकर केवल 18 प्रतिशत कर दिया जाए। इसी तरह, जिन वस्तुओं पर अभी 12 प्रतिशत जीएसटी है, उनमें से अधिकतर पर टैक्स घटकर सिर्फ 5 प्रतिशत रह जाएगा।
सरकार का कहना है कि 5 प्रतिशत की श्रेणी में “रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीज़ें” शामिल होंगी।
‘पाप कर’ (Sin Tax) 40%
इसके अलावा, सरकार ने तंबाकू उत्पाद जैसे कुछ चुनिंदा सामानों पर 40 प्रतिशत का विशेष ‘सिन टैक्स’ लगाने का प्रस्ताव किया है। सूत्रों ने बताया कि इस सूची में केवल पाँच से सात वस्तुएँ ही होंगी।
इन पर पहले से ही ऊँचे कर लागू हैं। उदाहरण के लिए, चबाने वाला तंबाकू 160 प्रतिशत उपकर (cess) झेलता है और सिगरेट पर जीएसटी, उपकर और नेशनल कैलैमिटी कंटिन्जेंसी ड्यूटी (NCCD) का मिश्रित टैक्स लगाया जाता है।
इसके अलावा, कुछ अन्य वस्तुएँ—जैसे श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख उद्योगों से जुड़ी चीज़ें, जैसे हीरे और कीमती पत्थर—पर अभी की दरें ही लागू रहेंगी।
अंत में, पेट्रोलियम उत्पाद अब भी जीएसटी ढाँचे से बाहर ही रहेंगे।
50,000 करोड़ की भरपाई खपत से
टैक्स ढाँचे के इस सरलीकरण से उपभोग (कंजम्पशन) बढ़ने की उम्मीद है, जो अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये की राजस्व हानि की भरपाई करेगा। इसकी अंतिम पुष्टि सितंबर में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक के बाद होगी।
आखिर क्या होगा सस्ता?
रोज़मर्रा में इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ें सस्ती होंगी। लेकिन, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें कौन-कौन सी वस्तुएँ शामिल होंगी।
जुलाई में सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया था कि इनमें टूथपेस्ट से लेकर छाता और छोटे घरेलू उपकरण—जैसे सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर और छोटे वॉशिंग मशीन—तक शामिल हो सकते हैं।

साइकिलें, रेडीमेड परिधान (जिनकी कीमत 1,000 रुपये से अधिक है) और जूते-चप्पल (500 रुपये से 1,000 रुपये के बीच) भी इस सूची में शामिल किए जा सकते हैं। इसी तरह वैक्सीन, सिरेमिक टाइल्स और कृषि उपकरणों को भी इसमें जगह मिल सकती है।
इसके अलावा, मोबाइल फोन और कंप्यूटर (जो आज की डिजिटल दुनिया में आवश्यक माने जाते हैं), बालों का तेल, प्रोसेस्ड फूड, और स्कूल के बच्चों के लिए स्टेशनरी सामान—जैसे ज्योमेट्री बॉक्स और कॉपियाँ—भी इसमें शामिल होंगे।
\वैसे, भारत की बहु-स्तरीय जीएसटी संरचना में आवश्यक वस्तुएँ और सेवाएँ—जैसे फल-सब्ज़ियाँ, कुछ अनाज, कुछ डेयरी उत्पाद और शिक्षा—पर जीएसटी शून्य प्रतिशत है।
18 प्रतिशत वाले स्लैब में क्या होगा?
नए 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में टेलीविज़न, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एरेटेड वाटर (कार्बोनेटेड पेय) शामिल होंगे। इसके अलावा, निर्माण उद्योग में इस्तेमाल होने वाली कुछ वस्तुएँ—जैसे रेडी-मिक्स कंक्रीट और सीमेंट—भी इसी श्रेणी में आने की संभावना है।
कार और बाइक पर क्या असर होगा?
फिलहाल यात्री वाहनों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है, साथ ही इंजन क्षमता, लंबाई और बॉडी टाइप के आधार पर 22 प्रतिशत तक का मुआवज़ा उपकर (Compensation Cess) भी लगाया जाता है।
इलेक्ट्रिक कारों पर मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी है और इनमें कोई मुआवज़ा उपकर नहीं लगता।
दोपहिया वाहनों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू है। 350 सीसी तक की इंजन क्षमता वाले मॉडलों पर कोई उपकर नहीं है, जबकि इससे अधिक इंजन क्षमता वाले मॉडलों पर 3 प्रतिशत का उपकर देना पड़ता है।
संशोधित जीएसटी ढाँचे में 28 प्रतिशत की श्रेणी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसका मतलब है कि कारें और बाइक अब नए 18 प्रतिशत स्लैब में आ सकती हैं, जिससे इनके दाम कम से कम 10 प्रतिशत तक सस्ते हो जाएंगे।
इन उम्मीदों के बीच सोमवार सुबह निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4.61 प्रतिशत उछल गया।
हालाँकि, किस उत्पाद पर कितना जीएसटी लागू होगा, इसकी पूरी सूची बाद में जारी की जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस बड़े जीएसटी सुधार और इसके चलते बढ़े खर्च से देश की आर्थिक वृद्धि को और गति मिलेगी, खासकर तब जबकि वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारत को हाल ही में बड़ी सकारात्मक रेटिंग दी है।
एस एंड पी (S&P) ने लगभग दो दशकों में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया है। एजेंसी ने भारत को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया है और इसके साथ ही “स्थिर दृष्टिकोण” (Stable Outlook) भी दिया है।
यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चौंकाने वाली टिप्पणी—“भारत एक मृत अर्थव्यवस्था है”—को पूरी तरह निराधार साबित करता है।



