देशभर में हड़कंप मचाने वाले कफ सिरप से जुड़े मामले ने अब उत्तराखंड सरकार को भी सतर्क कर दिया है। कई राज्यों में बच्चों की मौत के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ कंपनियों द्वारा निर्मित कफ सिरप में विषाक्त रसायन (टॉक्सिक सब्सटेंस) मिलाया गया था, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हुआ। इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर में छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन कफ सिरप में ‘डाइएथिलीन ग्लाइकॉल’ और ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी की संभावना जताई गई है। ये दोनों तत्व औद्योगिक उपयोग के लिए होते हैं, लेकिन गलती या लापरवाही से इनका इस्तेमाल दवा निर्माण में हो जाने पर यह गुर्दों (किडनी), लिवर और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले भी कई बार चेतावनी दी थी कि ऐसे रसायन बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में दवा विक्रेताओं और निर्माताओं की जांच की जाए। देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और रुड़की में औषधि नियंत्रण अधिकारियों की टीमों ने एक साथ छापेमारी कर संदिग्ध कफ सिरप के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों को विश्लेषण के लिए राज्य की प्रयोगशालाओं और सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी (सीडीएल) को भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन ब्रांडों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी बिक्री, वितरण और भंडारण को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। साथ ही, फार्मेसी दुकानों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे किसी भी उत्पाद को तुरंत शेल्फ से हटा दें और विभाग को इसकी सूचना दें। नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस निलंबन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार का कहना है कि जनता को भी जागरूक रहना चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी कफ सिरप या दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि किसी को ऐसे सिरप के सेवन के बाद उल्टी, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।
इस घटना ने देश की दवा सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा निर्माण इकाइयों की नियमित जांच और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और सख्त करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
उत्तराखंड सरकार ने साफ कहा है कि किसी भी दोषी कंपनी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में किसी दवा निर्माता की लापरवाही साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में केवल सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली दवाइयां ही जनता तक पहुंचें।



