“Followers नहीं होंगे तो काम नहीं मिलेगा”: 50 साल की संध्या मृदुल का दर्द — बॉलीवुड की हकीकत पर गहरा सवाल
बॉलीवुड की चमक-धमक जितनी दूर से आकर्षक लगती है, उतनी ही नज़दीक से यह संघर्ष और असमानता से भरी दुनिया है। हाल ही में अभिनेत्री संध्या मृदुल (Sandhya Mridul) ने एक वीडियो के माध्यम से इस इंडस्ट्री की कटु सच्चाई पर अपनी पीड़ा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में टैलेंट से ज़्यादा सोशल मीडिया फॉलोअर्स मायने रखते हैं। उनकी यह बात न सिर्फ एक व्यक्तिगत दर्द है, बल्कि बॉलीवुड की वर्तमान संस्कृति पर एक गहरा सवाल भी खड़ा करती है।
संध्या मृदुल, जो “पेज 3”, “साथिया” और “हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड” जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं, ने खुलकर कहा कि “अब सिर्फ एक्टिंग स्किल से कुछ नहीं होता, प्रोड्यूसर पूछते हैं — तुम्हारे कितने फॉलोअर्स हैं?” उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए ऑडिशन दिए, तो उन्हें टैलेंट नहीं बल्कि इंस्टाग्राम की लोकप्रियता के आधार पर आंका गया।
उनका कहना था — “मैंने सालों मेहनत की, थियेटर किया, किरदारों को जिया। लेकिन अब काम मिलने की शर्त है — सोशल मीडिया फेम।” उनके इस दर्द ने उन सभी कलाकारों की आवाज़ को बुलंद किया है जो सोशल मीडिया की ‘फॉलोअर रेस’ में पीछे रह गए हैं, लेकिन अभिनय की दुनिया में असली कलाकार हैं।
आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर वे लड़कियां और लड़के जो चमकदार बॉलीवुड में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें संध्या मृदुल का यह संदेश ध्यान से सुनना चाहिए। फेम और फॉलोअर्स के पीछे भागने से पहले टैलेंट और मेहनत की असली कीमत समझनी जरूरी है। सोशल मीडिया से पहचान बनाना बुरा नहीं है, लेकिन जब कला और लोकप्रियता के बीच संतुलन बिगड़ जाता है, तो रचनात्मकता की आत्मा खो जाती है।
बॉलीवुड में आज यह आम हो गया है कि जिनके पास लाखों फॉलोअर्स हैं, उन्हें ब्रांड डील्स और रोल्स जल्दी मिल जाते हैं। वहीं, थियेटर या ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले सच्चे कलाकार अवसरों से वंचित रह जाते हैं। यह प्रवृत्ति केवल फिल्म इंडस्ट्री को नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता को भी प्रभावित कर रही है — जहां वास्तविक मेहनत और कला की जगह ‘वायरल होने’ की संस्कृति ने ले ली है।
युवाओं के लिए संदेश:
संध्या मृदुल की यह कहानी केवल शिकायत नहीं, बल्कि चेतावनी है। जो युवा आज बॉलीवुड में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि लंबी दौड़ में वही सफल होता है जो अपने हुनर को ईमानदारी से निखारता है, न कि केवल दिखावे के लिए मंच बनाता है।
बॉलीवुड में ग्लैमर और फॉलोअर्स की दुनिया तेजी से हावी हो रही है, लेकिन सच्चा कलाकार वही है जो अपने अभिनय से लोगों के दिलों को छू सके। संध्या मृदुल का यह साहसिक बयान उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने टैलेंट पर विश्वास रखते हैं — चाहे दुनिया उन्हें पहचानने में देर क्यों न करे।



