
रुड़की। औषधि विभाग हरिद्वार और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने भगवानपुर क्षेत्र के पुहाना स्थित लूसेंट बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारकर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान टीम ने फर्जी कंपनी के नाम पर बनाई जा रही 30 लाख ट्रामाडोल टैबलेट्स के निर्माण के लिए रखे गए 325 किलो सक्रिय औषधीय घटक (API) को ज़ब्त किया। यह नशीली दवा विभिन्न राज्यों, विशेष रूप से पंजाब, में भेजी जानी थी।
पंजाब से मिले एक महत्वपूर्ण इनपुट के आधार पर यह छापा बुधवार को मारा गया। टीम का नेतृत्व वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती ने किया, जिनके साथ पंजाब पुलिस, पंजाब ड्रग्स कंट्रोल विभाग, और हरिद्वार औषधि विभाग की अधिकारी मेघा भी शामिल रहीं।
प्लांट हेड दस्तावेज़ नहीं दिखा सका, मौके पर गिरफ्तार

जांच के दौरान कंपनी के प्लांट हेड हरी किशोर आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सके, जिस पर उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे पूछताछ जारी है और उनके खिलाफ NDPS एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
फर्जी कंपनी के नाम पर बनाई जा रही थी दवा
कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जब्त की गई ट्रामाडोल दवाएं कॉन्नेन्ड्रम फार्मास्युटिकल्स, मेरठ नामक कंपनी के नाम पर बनाई जा रही थीं, लेकिन जांच में यह कंपनी अस्तित्वहीन पाई गई। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने रिकॉल लाइफ साइंसेज़, रुड़की के साथ किया गया एक एग्रीमेंट भी दिखाया, जिसके माध्यम से वैध लाइसेंस के तहत पंजाब में दवाओं की आपूर्ति की जा रही थी।
इस फर्म का मालिक आर्यन पंत बताया गया है, जो फिलहाल फरार है। उसका मोबाइल फोन बंद मिला है, जबकि एक अन्य व्यक्ति विक्रम सैनी, जो इस खेप के ऑर्डर से जुड़ा बताया जा रहा है, को पूछताछ के लिए कंपनी बुलाया गया है।
पंजाब में पहले ही जब्त हो चुकी हैं 70,000 ट्रामाडोल टैबलेट्स
गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब के अमृतसर कमिश्नरेट थाना ए डिवीजन क्षेत्र में 70,000 ट्रामाडोल टैबलेट्स जब्त की गई थीं। जांच में यह सामने आया कि इन टैबलेट्स का निर्माण लूसेंट बायोटेक द्वारा ही किया गया था। उसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए यह कार्रवाई की गई है।
दवा निर्माण पर तत्काल रोक, अनुमोदन निरस्त करने की संस्तुति
कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री में चल रहे ट्रामाडोल के उत्पादन को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। साथ ही, कंपनी को मिले पूर्व स्वीकृत लाइसेंस और अनुमोदनों को निरस्त करने की संस्तुति भी औषधि विभाग द्वारा की गई है।



