रुड़की, 08 मई 2026: मदरहुड विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस स्टडीज़ द्वारा सूरजमल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ के अकादमिक सहयोग से “रचनात्मकता, नवाचार और अनुसंधान जगत में प्रगति: सतत सृजन के लिए विचारों का जुड़ाव” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (08-09 मई 2026) का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय सभागार में भव्य रूप से आयोजित किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) बी. बी. मलिक ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी रचनात्मकता और नवाचार की सदी है तथा सतत ज्ञान निर्माण के लिए अंतःविषयक विचारों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोध केवल डिग्री प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान और राष्ट्र निर्माण का सशक्त उपकरण है।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय संस्कृति सदैव ज्ञान, चिंतन और अनुसंधान आधारित रही है। ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शोधार्थियों और शिक्षकों को नवीन तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक चुनौतियों पर विचार साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं।सम्मेलन का उद्देश्य शोध, नवाचार, प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना तथा ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में भारत सहित उज़्बेकिस्तान और मस्कट से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।सम्मेलन के संरक्षक प्रो. (डॉ.) सतीश कुमार शर्मा ने प्रबंधन विज्ञान की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल परिवर्तन और जलवायु संकट के दौर में शोधकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने शोध में नैतिकता, मौलिकता और व्यावसायिक दायित्वों के पालन पर जोर दिया।
कार्यक्रम के निदेशक एवं डीन फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस स्टडीज़ प्रो. (डॉ.) पी. के. अग्रवाल ने स्वागत भाषण में कहा कि यह सम्मेलन केवल शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता, सतत विकास और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बौद्धिक पहल है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो दिनों के दौरान 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
प्रो. हर्ष वी. पंत ने कहा कि रचनात्मकता एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें प्रश्न पूछना और समाधान तलाशना आवश्यक है। वहीं प्रो. आनंद एस. ने वर्चुअल संबोधन में वैश्विक शोध और नवाचार में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा डेटा साझाकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अलावा प्रो. के. शंकर गणेश ने कहा कि आज विश्व में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी समन्वय और प्रबंधन की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र के बाद “Emerging Trends in Business Innovation” विषय पर प्रथम तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. आनंद एस. ने की। इसमें देश-विदेश के 20 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर कुलसचिव अजय गोपाल शर्मा, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित




