पश्चिम बंगाल में मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 23 वर्षीय युवती का हॉस्टल के बाहर रेप । यह घटना रात 8 से 9 बजे के बीच की बताई जा रही है — यानी वह समय जब शहरों में आम लोग अब भी अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त होते हैं। लेकिन घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जो बयान दिया, उसने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि “छात्राओं को देर रात हॉस्टल से बाहर नहीं जाना चाहिए।”
उनका यह बयान न केवल पीड़िता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता को भी चुनौती देता है। सवाल उठता है — क्या इस देश में महिलाओं को रात के समय बाहर निकलने का अधिकार नहीं है? क्या भारत का संविधान केवल दिन में ही लागू होता है?
संविधान बनाम बयानबाज़ी
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है — चाहे वह पुरुष हो या महिला। अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को बराबरी, भेदभाव से सुरक्षा और जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं। कोई भी मुख्यमंत्री या सरकार इन अधिकारों को सीमित करने वाला बयान नहीं दे सकती। रात 8 या 9 बजे किसी महिला का बाहर होना ‘देर रात’ नहीं कहा जा सकता — यह उनके जीवन का सामान्य हिस्सा है। अगर वह सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सरकार और सिस्टम की विफलता है, न कि पीड़िता की गलती।
घटना और प्रशासन की लापरवाहीमेडिकल छात्रा के परिवार ने पहले ही बताया था कि उनकी बेटी की जान को खतरा है, लेकिन कॉलेज प्रशासन और पुलिस ने समय पर कोई कदम नहीं उठाया। परिणाम — एक होनहार छात्रा की ज़िंदगी खत्म हो गई। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन सवाल यह है कि यह अपराध रोका क्यों नहीं गया?
‘Victim Blaming’ की मानसिकता
ममता बनर्जी का बयान उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें अपराधी के बजाय पीड़िता के व्यवहार पर उंगली उठाई जाती है। यह वही सोच है जो अक्सर समाज में सुनाई देती है — “इतनी रात को बाहर क्यों निकली?”, “कपड़े कैसे थे?”, “अकेली क्यों थी?”। ऐसी सोच अपराधियों को ताकत देती है और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करती है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
विपक्ष और महिला संगठनों ने मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया पर भी भारी विरोध हुआ। लोगों का कहना है कि एक महिला मुख्यमंत्री से अपेक्षा थी कि वे पीड़िता के पक्ष में सख्त कदमों की घोषणा करेंगी, लेकिन बयान ने महिलाओं की स्वतंत्रता पर ही प्रश्न खड़े कर दिए।
यह मामला केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि इस देश में महिलाओं की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की वास्तविक स्थिति पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।
रात में बाहर निकलना अपराध नहीं है — अपराधी की मानसिकता अपराध है। यदि किसी राज्य की मुख्यमंत्री यह कहती हैं कि लड़कियों को देर रात बाहर नहीं जाना चाहिए, तो यह प्रशासनिक कमजोरी को छिपाने का प्रयास मात्र है।
भारत का संविधान महिलाओं को दिन-रात समान अधिकार देता है। सवाल यह नहीं कि लड़की बाहर क्यों निकली… सवाल यह है कि बाहर निकली लड़की सुरक्षित क्यों नहीं थी?



