सिनेमा जगत की सबसे बड़ी शाम — 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 — इस बार पूरी तरह ‘लापता लेडीज़’ के नाम रही! गुजरात टूरिज़्म के सहयोग से आयोजित इस भव्य समारोह में बॉलीवुड के लगभग सभी बड़े सितारे मौजूद रहे। मंच पर चमक थी, ग्लैमर था, और हर तरफ बस सिनेमा का जादू बिखरा हुआ था।
शो की शुरुआत धमाकेदार परफॉर्मेंस के साथ हुई, जहाँ अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन, अनन्या पांडे, कृति सेनन और सिद्धांत चतुर्वेदी ने एक से बढ़कर एक नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं मंच पर शाहरुख खान, काजोल और करण जौहर की उपस्थिति ने इस इवेंट को और भी यादगार बना दिया।
लेकिन इस पूरे जलसे की असली चमक बनी किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज़’। इस फिल्म ने न सिर्फ़ दर्शकों के दिलों को जीता, बल्कि अवॉर्ड्स की झोली भी अपने नाम कर ली। बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस — हर कैटेगरी में ‘लापता लेडीज़’ का बोलबाला रहा।
अवॉर्ड्स की पूरी लिस्ट ने मचाया धमाल
- बेस्ट फिल्म: लापता लेडीज़
- बेस्ट फिल्म क्रिटिक्स: आई वांट टू टॉक
- बेस्ट डायरेक्टर: किरण राव (लापता लेडीज़)
- बेस्ट एक्टर: अभिषेक बच्चन (आई वांट टू टॉक) और कार्तिक आर्यन (चंदू चैंपियन)
- बेस्ट एक्ट्रेस: आलिया भट्ट (जिगरा)
- बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल: रवि किशन (लापता लेडीज़)
- बेस्ट एक्ट्रेस इन सपोर्टिंग रोल: छाया कदम (लापता लेडीज़)
- बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस: निताशा गोयल (लापता लेडीज़)
‘लापता लेडीज़’ की टीम के लिए यह शाम किसी सपने से कम नहीं थी। निर्देशक किरण राव ने स्टेज पर ट्रॉफी लेते हुए कहा, “यह फिल्म उन अनकही कहानियों की आवाज़ है, जो अक्सर सिनेमा के पर्दे से गुम हो जाती हैं।” उनकी यह बात सुनते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
वहीं, अभिषेक बच्चन और कार्तिक आर्यन की परफॉर्मेंस ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया। दोनों ने अपने शानदार अभिनय से यह साबित कर दिया कि बॉलीवुड में टैलेंट की कोई कमी नहीं। अनन्या पांडे ने अपने एनर्जेटिक डांस से शो में जान डाल दी, जबकि कृति सेनन और अक्षय कुमार की जुगलबंदी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
इस साल का फिल्मफेयर अवॉर्ड शो सिर्फ़ ग्लैमर का नहीं, बल्कि कंटेंट और टैलेंट का जश्न था। ‘लापता लेडीज़’ जैसी फिल्म ने यह साबित कर दिया कि अच्छी कहानी और सच्चे अभिनय की ताकत हर बड़े बजट फिल्म को मात दे सकती है।
शाम के अंत में जब पूरा ऑडिटोरियम ‘लापता लेडीज़’ के सम्मान में खड़ा हुआ, तो यह सिर्फ़ एक फिल्म की जीत नहीं थी — यह महिलाओं की आवाज़, सशक्तिकरण और भारतीय सिनेमा की नई दिशा की जीत थी।
✨ ‘लापता लेडीज़’ अब सिर्फ़ फिल्म नहीं, एक फीलिंग बन चुकी है — जो सिनेमा को उसकी जड़ों तक वापस ले गई है!




