हरिद्वार:- अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में उत्तराखंड हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक मिलने के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ ज्वालापुर स्थित अपने आवास पर पहुँचे। घर पहुँचने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपना पक्ष रखा और पूरे विवाद के लिए उर्मिला तथा कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरी आस्था है। न्याय की उम्मीद में वे दो बार गोलू देवता के मंदिर भी जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि गोलू देवता न्याय के देवता हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि सच्चाई सामने आएगी। राठौड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे भगवा वस्त्र धारण नहीं करेंगे।
सुरेश राठौड़ ने उर्मिला पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने समाज को गुमराह किया है और एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उन्हें और उनके साथियों को फँसाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में कांग्रेस की भी भूमिका रही है और राजनीतिक उद्देश्य से उन्हें बदनाम किया गया। पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि रविदास पीठ को बदनाम करने का प्रयास किया गया, जबकि उन्होंने किसी के लिए भी आपत्तिजनक या अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया। राठौड़ ने कहा कि यदि किसी मामले में कोई दोषी छूट गया है या कहीं कोई कानूनी कमी है, तो उस पर निर्णय लेने का अधिकार सरकार को है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को।

उन्होंने कहा कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। वायरल ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर राठौड़ ने दावा किया कि वे पूरी तरह फर्जी हैं और उन्हें साजिश के तहत फैलाया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी भी नेता के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब दिसंबर के अंत में उर्मिला सनावर की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। वीडियो में कथित रूप से उर्मिला और सुरेश राठौड़ के मोबाइल पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई गई, जिसमें अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर बातचीत का दावा किया गया। इस ऑडियो के वायरल होते ही लगभग तीन साल पुराना यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया।

उल्लेखनीय है कि बहादराबाद थाने में 27 दिसंबर को मुकदमा दर्ज होने के बाद सुरेश राठौड़ करीब 11 दिनों तक फरार बताए गए थे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब वे सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। इस बीच भाजपा पहले ही उन्हें पार्टी से निष्कासित कर चुकी है। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और एसआईटी किसी भी स्तर पर जांच कर सकती है। सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि यदि कहीं कोई चूक पाई जाती है तो उस पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सुरेश राठौड़ ने दोहराया कि उनकी संवेदनाएँ अंकिता भंडारी के परिवार के साथ हैं और वे चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले।




