अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका–ईरान तनाव के बीच रूड़की के मंगलौर क्षेत्र में शिया समुदाय द्वारा बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन मोहल्ला पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े में हुआ, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने अमेरिका के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी
प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की भागीदारी भी बड़ी संख्या में देखने को मिली। महिलाओं और पुरुषों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अमेरिका विरोधी नारे लगाए तथा उसे तानाशाही शक्ति करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इतिहास गवाह है—ज़ुल्म और तानाशाही अधिक समय तक नहीं टिकती। उन्होंने 1400 वर्ष पूर्व की घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि जब यज़ीद की तानाशाही नहीं चल सकी, तो आज किसी भी महाशक्ति की तानाशाही भी स्थायी नहीं रह सकती।
आयतुल्लाह अली ख़ामेनई को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान आयतुल्लाह अली ख़ामेनई की मौत के दावों को लेकर समुदाय में गहरा आक्रोश और भावनात्मक माहौल देखने को मिला। लोगों ने कहा कि वे इसे अंत नहीं, बल्कि “शहादत” मानते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ख़ामेनई लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे। इस दौरान मातमी माहौल रहा और कई लोग भावुक दिखाई दिए।
अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी का आरोप
शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना करने और निर्दोष लोगों पर हमले करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ऐसी कार्रवाइयाँ वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।
भारत सरकार से शांति बनाए रखने की अपील
प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से अपील की कि देश में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर देश की आपसी भाईचारे की भावना पर न पड़े।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
यह विरोध प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के स्थानीय स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव और समुदाय की भावनात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।




